Friday, January 30, 2009

वही पुरानी कलम...

१
सोते-सोते याद आया
मुझे कुछ लिखना है
वही पुरानी कलम
सफेद कागज पर घिसना है।
२
सोचा क्या लिखंू
मगर कुछ लिखना है
वही पुरानी कलम
सफेद कागज पर घिसना है।

३
लेखक कहलाता हूं
किसी पर तो लिखना है
वही पुरानी कलम
सफेद कागज पर घिसना है।

४
खबरें तो बहुत लिखी
किसी भ्रष्ट नेता पर लिखना है
वही पुरानी कलम
सफेद कागज पर घिसना है।

५
इस कला से इतिहास लिखूं
किसी से क्या डरना है
वही पुरानी कलम
सफेद कागज पर घिसना है।

मनोज कुमार राठौर

2 comments:

  1. वही पुरानी कलम सफेद कागज पर खिसना है। ....

    बहुत सही लिखा है ...


    अनिल कान्त
    मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

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  2. सही कहा ...विचार कुछ भी हों....कलम वही....कागज वही..अच्‍छा लिखा।

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