Saturday, September 12, 2009

हवा में सांस मिलाकर

हवा में सांस मिलाकर
बयान करता हूं
हम भी तूफ़ान ला सकते हैं-2

इतना कमजोर न समझ
हम वो बादल हैं
जो पानी गिरा सकते हैं-2

धैर्य
मत आजमा
हम वो सेलाब हैं
जो समुद्र में सकते हैं-2

गलती जो रहे मेरी
हम वो बलिदानी हैं
जो सिर कटा सकते हैं-2

मनोज राठौर

1 comment:

  1. अच्छी आशावादी कविता है.....

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