Tuesday, November 18, 2008

मालेगांव मामले में एटीएस का रवैया ढिला!

मनोज कुमार राठौर
महाराष्ट के मालेगांव बम विस्फोट मामले में लेफ्निंेट कर्नल श्रीकांत पुरोहित को दोषी ठहराया गया। एटीएस ने कर्नल के खिलाफ सबूत भी जुटाए, लेकिन अभी तक पैस नहीं किए। अदालत में कर्नल की पेसी पर पेसी कराई जा रही है। इन पेसियों का अभी तक कोई निर्णय नहीं निकला। अब तो ऐसा लगता है कि एटीएस की टीम अंधेरें में तीर चला रही हो। एटीएस के अनुसार आरोपी पुरोहित ने 60 किलो आरडीएक्स सेना के डिपो में जमा नहीं किया था। इस आरडीएक्स का इस्तेमाल समझौता एक्सप्रेस में हुए बम धमाकों में किया गया था, परन्तु इस मामले में सेना के वरिष्ट अधिकारियों का कहना है कि यदि जम्मू कश्मीर मंे आतंकवादियों से आरडीएक्स बरामद किया जाता है तो वह आर्टिलरी यूनिट के अधिकारियों के हवाले किया जाता है। बाद में इस आरडीएक्स को राज्य पुलिस को सौंप दिया जाता है। लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित चूंकि मिलिट्री इंटेलिजेंस में तैनात थे, इसलिए उनके पास आरडीएक्स जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। इस मामले में तो मानो कानुन का सारेआम मज़ाक उडाया जा रहा है। यदि कर्नल की तैनाती में आरडीएक्स गायब हुआ है तो उसे सजा देना चाहिए और कर्नल मिलिट्री इंटेलिजेंस में तैनात थे तो उन्हें इस मामले से बरी किया जाना चाहिए। एटीएस के इस ढिले रवैये से ऐसा लगता है कि इस मामले के फैसले में वर्षों लग जाएगें।

2 comments:

  1. आपने बहुत सही विश्लेषण किया है. एक बात पर आपका ध्यान दिलाना चाहूँगा. जब से यह ऐटीएस का स्वांग शुरू हुआ है तबसे और बम धमाकों की खबरें आनी बंद हो गई हैं. अब तो यह लगने लगा है कि जयपुर, अहमदाबाद, बंगलौर, दिल्ली, गुवाहाटी में बम धमाके हुए ही नहीं थे. कोई सपना देखा था हमने. बस यह अकेला धमाका हुआ है जिस की जांच ऐटीएस कर रही है.

    कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियाँ, मीडिया, स्वघोषित बुद्धिजीवी, मुसलमानों का एक वर्ग, सब एक कोशिश कर रहे हैं कि इस देश को कैसे एक बार फ़िर विभाजित करवाया जाय. उनका अभी का उद्देश्य है किसी तरह चुनाव जीतना, और उस के लिए हिन्दुओं को बदनाम कर मुसलमानों को खुश करने का षड़यंत्र हो रहा है. कोई स्पष्ट नतीजा निकले ऐसा किसी का कोई इरादा नहीं है.

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