Tuesday, February 3, 2009

पैरों में छाले पड़ न जाए।

1
इतनी ऊंची उड़ान न भरना
आसमा देखे और शर्मा जाए
दूर इतने ही जाना
निचे खड़े लोग देख पाए।
2

कदम जल्दी न बढ़ना
पत्थरी जमीन पर चलना
जरा नीचे भी देखना
पैरों में छाले पड़ न जाए।
3
मुंह के पर खड़े न रहना
दुनिया के रंगों में ढलना
बातंे तोल के करना
कहीं जुवां फिसल न जाए।

मनोज कुमार राठौर

2 comments:

  1. बहुत उम्दा सोच!

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  2. आप सादर आमंत्रित हैं, आनन्द बक्षी की गीत जीवनी का दूसरा भाग पढ़ें और अपनी राय दें!
    दूसरा भाग | पहला भाग

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